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80 की उम्र में बिल्कुल अकेली हैं उषा नाडकर्णी, पति से नहीं कोई नाता, बेटा नहीं मानता मां, एक्ट्रेस ने सुनाई 40 साल के अकेलेपन की आपबीती

 Written By: Jaya Dwivedie
 Published : Aug 06, 2026 03:10 pm IST,  Updated : Aug 06, 2026 03:10 pm IST

'पवित्र रिश्ता' फेम 80 वर्षीय उषा नाडकर्णी ने बचपन में पिता की प्रताड़ना झेली। पति से अलगाव और बेटे से दूरी के बावजूद, वे 1987 से अकेले रहकर निडरता से अपनी जिंदगी जी रही हैं।

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ऊषा नाडकर्णी। Image Source : STAR PLUS (CELEBRITY MASTERCHEF)

लोकप्रिय टीवी धारावाहिक 'पवित्र रिश्ता' में अपने दमदार अभिनय से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री उषा नाडकर्णी लगभग सात दशकों से अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं। हिंदी और मराठी सिनेमा से लेकर छोटे पर्दे तक, उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं को पर्दे पर जीवंत किया है। उनका करियर हमेशा उनकी अपनी शर्तों पर बना, हालांकि उन्होंने कई बार पैसों की खातिर भी काम किया, तब भी जब उन्हें लगता था कि उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा जिसकी वे हकदार हैं। 80 वर्ष की उम्र में भी मुंबई के एक अपार्टमेंट में अकेले रहकर वे अपनी जिंदगी और काम की जिम्मेदारी खुद उठा रही हैं।

क्रूर पिता का खौफ और मां का घर से निकालना

उषा नाडकर्णी का बचपन बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक माहौल में बीता। उनके पिता एयरफोर्स में अधिकारी थे, लेकिन उनका व्यवहार बेहद हिंसक और गुस्से से भरा था। वे अक्सर उषा, उनके भाई-बहनों और उनकी मां को बेरहमी से पीटते थे। एक इंटरव्यू में उषा ने अपने पिता की इस प्रताड़ना का जिक्र करते हुए बताया था कि यदि अखबार थोड़ा सा भी मुड़ा हुआ दिखता या बच्चों की किताबें करीने से नहीं रखी होतीं तो उनके पिता आपा खो बैठते थे और किताबें फाड़ डालते थे। खौफ का आलम यह था कि भाई-बहनों में से किसी एक की पिटाई होते देख बाकी बच्चे डरकर भाग जाते थे। एक बार उनके पिता उनके भाई को बेदर्दी से पीट रहे थे, जब उषा ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो पिता ने उन पर नारियल काटने वाले कोइता से हमला कर दिया।

मां को नहीं पसंद था कि उषा बनें एक्टर

उनके हाथ पर गहरा घाव हुआ, लेकिन अगले ही दिन वे उस चोट के साथ नाटक में अभिनय करने गईं। पिता के इस कड़े रवैये के कारण वे कभी अपने अभिनय के सपने को उनसे साझा नहीं कर पाईं। जब उन्होंने अपनी मां जो एक शिक्षिका थीं को एक्टर बनने की ख्वाहिश बताई, तो मां को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उनके मध्यवर्गीय परिवार में पड़ोसियों के तानों का बहुत डर था। जब उषा ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो उनकी मां ने उनका सारा सामान उठाकर सड़क पर फेंक दिया और घर से निकाल दिया। इसके बाद उषा को हफ्ते भर अपनी एक सहेली के घर शरण लेनी पड़ी, जब तक कि उनके पिता उन्हें वापस घर नहीं ले आए।

पति से अलगाव और बेटे की परवरिश की कड़वी सच्चाई

उषा नाडकर्णी ने कभी अपने निजी जीवन और पति के बारे में खुलकर बात नहीं की। हाल ही में उन्होंने पहली बार खुलासा किया कि वे अपने पति से बहुत साल पहले ही अलग हो चुकी थीं। हालांकि उनके दिल में पति या उनके परिवार के प्रति कोई कड़वाहट नहीं है, वे आज भी उनके परिवार के लिए लंच-डिनर का आयोजन करती हैं। शादी से उनका एक बेटा है जो अब विदेश में बसा हुआ है। काम में व्यस्त रहने के कारण उषा अपने बेटे को पर्याप्त समय नहीं दे पाती थीं। उनके भाई का घर बड़ा था, इसलिए उनका बेटा अपनी नानी और मामा के पास रहकर बड़ा हुआ। मराठी नाटकों की व्यस्तता के कारण दिन में कई-कई शो करने पड़ते थे, जिससे वे बेटे से सिर्फ समय मिलने पर ही मिल पाती थीं। उषा ने बेहद भावुक होकर साझा किया कि उनका बेटा आज उनसे कहता है, 'आपने तो सिर्फ मुझे जन्म दिया है, मेरी असली मां तो मेरी नानी ही थीं।' ऐसे में बेटा उनसे ज्यादा अटैच्ड नहीं है और वो मां का दर्जा उन्हें नहीं बल्कि नानी को देता है। एक्ट्रेस को बेटे से दूरी रहने का आज भी मलाल है।

1987 से अकेलापन और मौत से जुड़े सवाल

उषा का बेटा विदेश में रहता है और उनके सभी भाई-बहनों का निधन हो चुका है, जिसके चलते वे पूरी तरह से अकेली रह गई हैं। साल 1987 से यानी लगभग चार दशकों से वे अकेले ही जिंदगी गुजार रही हैं। शुरुआती दिनों में जब वे अपने नए अपार्टमेंट में आई थीं तो उन्हें अकेले रहने में डर लगता था। उन्हें लगता था कि पीछे से कोई हमला न कर दे, इसलिए वे अक्सर वॉचमैन को अपने साथ दरवाजे तक आने को कहती थीं, लेकिन वक्त के साथ उनका यह डर पूरी तरह खत्म हो गया। अब 80 वर्ष की उम्र में वे मौत से जुड़े सवालों का सामना बहुत ही शांत मन से करती हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अकेले रहने और अचानक दुनिया से चले जाने का डर सताता है तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया कि इंसान यह तय नहीं कर सकता कि उसकी मौत कैसे होगी। कुछ लोग सोते-सोते चले जाते हैं तो कुछ अस्पताल में दम तोड़ते हैं। उन्हें इस बात का जरा भी डर नहीं है। वे मानती हैं कि अगर कभी वे अपनी नींद में ही गुजर गईं तो पड़ोसी दरवाजा खटखटाकर यही सोचेंगे, 'बुड्ढी ने आज दरवाजा नहीं खोला है।'

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